khushiyan

सोमवार, 31 दिसंबर 2012


माँ  मै  जीना चाहती हूँ,
भले ही आंसूं हो किस्मत में मेरे,
पर उन आंसुओं को भी ,
पीना चाहती हूँ ,,
माँ मै जीना चाहती हूँ ..
ये दुनिया बड़ी खूबसूरत है माँ,
ये इतराता सूरज,
ये बल खाती नदियाँ ,
ये पूनम,अमावस,
ये पत्ती ये कलियाँ 
इन्हें अपनी आँखों में,
सीना चाहती हूँ ,
माँ मै जीना चाहती हूँ ..
रात के अँधेरे में पेड़ों के पीछे,
देखो चाँद बैठा है आँखों को मीचे,
रंग बिरंगी लड़ियों से रोशन कतारें,
बारिश में गिरती रिमझिम फुहारें,
भईया सा मै भी झूमना चाहती हूँ 
माँ ओ माँ मै जीना चाहती हूँ .........
                ऐसे असंख्य ख्वाब अपने आँखों में सजाये निर्भया चली गई,अपनी  रोती  माँ बिलखते पिता और दो छोटे भाई जिनके लिए वो बहुत कुछ करना चाहती थी सभी को छोड़ कर .......और साथ में एक सवाल छोड़ कर की क्या हम अब भी गर्व करें कि  हम भारतीय है,, हम ऐसे देश में रहते है जहाँ कन्या की पूजा होती है,,जहाँ सत्ता पक्ष और विपक्ष की प्रमुख महिला हैं????????? 
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pallavi.

गुरुवार, 20 दिसंबर 2012

आज पूरा देश बेचैन है,आक्रोशित है,आन्दोलन हो रहे है,लोग सड़कों पर उतर आये हैं,मीडिया भी खबरों के साथ हाजिर है पूरा देश उन दरिंदों को कड़ी से कड़ी सजा की मांग कर  रहा है .........लेकिन जिसके साथ ये घटा उसका क्या वो पता नही बचेगी भी या नहीं और बची भी तो कैसे जियेगी एक सामान्य जिन्दगी .......और बात सिर्फ उसी लड़की की नही है देश की किसी भी हिस्से की कोई भी लड़की यहाँ तक 3 माह की बच्ची भी सुरक्षित नहीं है,,,मेरी हर दोस्त जिसकी बेटी है वो हर पल डर  के साए में जीती है,,,,,,आखिर कब तक लड़कियाँ अपने स्त्रीत्व के कारण अपमानित होती रहेंगी,,,सिर्फ कानून बनाने से कुछ नहीं होगा जब तक स्त्री के प्रति उपभोग की मानसिकता नहीं बदलेगी तब तक कुछ नहीं होगा ......ये गुजारिश है हर उस पिता से जिनके लिए उनकी बेटी की मुस्कान ही दुनिया की सबसे खूबसूरत चीज है,हर उस भाई से जिनकी बहने उनके लिए ईश्वेर का अनमोल तोहफा हैं,उन बेटों से जिन्हें अपनी माँ में भगवान के दर्शन होते हैं और उन सभी दोस्तों से जो अपनी महिला  दोस्तों और अपनी जीवनसंगिनी के आँखों का आंसू नहीं देख पाते इस समाज की हर लड़की चाहे वो आपकी बहन,बेटी,बीवी हो न हो उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी आप ले उनके प्रति अपनी व् सम्पूर्ण समाज की  मानसिकता बदलें ..............

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pallavi.