khushiyan

सोमवार, 31 दिसंबर 2012


माँ  मै  जीना चाहती हूँ,
भले ही आंसूं हो किस्मत में मेरे,
पर उन आंसुओं को भी ,
पीना चाहती हूँ ,,
माँ मै जीना चाहती हूँ ..
ये दुनिया बड़ी खूबसूरत है माँ,
ये इतराता सूरज,
ये बल खाती नदियाँ ,
ये पूनम,अमावस,
ये पत्ती ये कलियाँ 
इन्हें अपनी आँखों में,
सीना चाहती हूँ ,
माँ मै जीना चाहती हूँ ..
रात के अँधेरे में पेड़ों के पीछे,
देखो चाँद बैठा है आँखों को मीचे,
रंग बिरंगी लड़ियों से रोशन कतारें,
बारिश में गिरती रिमझिम फुहारें,
भईया सा मै भी झूमना चाहती हूँ 
माँ ओ माँ मै जीना चाहती हूँ .........
                ऐसे असंख्य ख्वाब अपने आँखों में सजाये निर्भया चली गई,अपनी  रोती  माँ बिलखते पिता और दो छोटे भाई जिनके लिए वो बहुत कुछ करना चाहती थी सभी को छोड़ कर .......और साथ में एक सवाल छोड़ कर की क्या हम अब भी गर्व करें कि  हम भारतीय है,, हम ऐसे देश में रहते है जहाँ कन्या की पूजा होती है,,जहाँ सत्ता पक्ष और विपक्ष की प्रमुख महिला हैं????????? 
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pallavi.

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