khushiyan

मंगलवार, 30 अक्टूबर 2012

दीवानों की इस महफिल में हर दिल का एक फसाना है ,
रातें इनकी सदियों लम्बी,हर हाथ में एक पैमाना है ..

       चूड़ी  उनकी चंदा जैसी,बिंदिया जैसे डूबती शाम,
     कुदरत के हर जर्रे पर उनको दिखे सनम का नाम।।

गेसू बादल बूँदें बारिश,आशिक का यही तराना है,
दीवानों की इस महफिल में हर दिल एक फसाना है।।

     भीगीं आँखे, सूनी रातें,हर हवा का झोंका दे पैगाम,,
  हर रस्ते पर, हर एक मोड़ पे, उनको ढूंढें मचलती शाम ..

गोदमे उनके सर रख के गुजरे,एक ऐसी शाम चुराना है ,
दीवानों की इस महफिल में हर दिल का एक फसाना है ... 

सोमवार, 29 अक्टूबर 2012


शबनम बिखरी हर तरफ फिर,
फिर वही  चांदनी रात है,
प्रेम की चादर ओढ़ी दुल्हन,
खोई खोई कायनात है ..
रूमानी सा हर हवा का झोंका,
बहका सा हर अल्फाज है,
दिन को रातों की खबर नहीं,
हर लम्हा बेकरार है,
कह  दो कि ये कुछ और नहीं,
बस प्यार है बस प्यार है।।।  
 छलक रही क्यूँ चांदनी,
 क्या चाँद को सूझा रास है,
बहक रहा हर फूल फूल,
 बहकी हवा भी आज है ,,
न तुम कुछ बोलो न सुनेंगे हम कुछ ,
आँखों ने किया  इज़हार है,
कह  दो की ये कुछ और नहीं,
बस  प्यार है बस प्यार है .....  

बुधवार, 24 अक्टूबर 2012

जो तुम हमको मिल जाते तो लम्हे बेचैन नहीं होते,

जो हम तुमको मिल जाते तो यूँ सूने रैन नहीं होते,
कुछ तुम कहते ,कुछ हम,तुम्हे देखते,तुम्हे पूजते ,
अंजान राहों पे सूनसान सी सडकों पर तेरे साथ चलते,

   जो तुम हमको मिल जाते तो लम्हे बेचैन नहीं होते।।

ख्वाबों सा गुलसितां सजाते,तिनको से आशियाँ बनाते ,
जो रूठ जाते कभी तुम मुझसे,कान पकड़ के तुम्हे मनाते,
तेरे बाँहों के घेरे में अपना प्यारा जहाँ बसाते ,

जो तुम हमको मिल जाते तो हम यूँ बेचैन नहीं होते ..




शबनम बिखरी हर तरफ फिर,
फिर वही  चांदनी रात है,
प्रेम की चादर ओढ़ी दुल्हन,
खोई खोई कायनात है ..
रूमानी सा हर हवा का झोंका,
बहका सा हर अल्फाज है,
दिन को रातों की खबर नहीं,
हर लम्हा बेकरार है,
कह  दो कि ये कुछ और नहीं,
बस प्यार है बस प्यार है।।।  

मंगलवार, 16 अक्टूबर 2012

सर्वमंगल मांगल्ये,शिवे सर्वार्थसाधिके,शरण्येत्र्यम्बिके गौरी नारायणी नमोस्तुते ......
आप सभी के मंगल की शुभ कामनाओं के साथ आप सभी को नवरात्री की हार्दिक शुभकामनाएँ ....

सोमवार, 15 अक्टूबर 2012

कल मैंने आप सबसे अपनी माँ की खूबियों को साझा किआ था ,आज अपने ब्लॉग के दूसरे पृष्ठ को  मै  अपने पापा को समर्पित करना चाहती हूँ ,,किसी भी लड़की के लिए पापा उसकी जिन्दगी के पहले पुरुष होते हैं ,जिनकी ऊँगली पकड़ कर वो हर मुश्किल राह पर आगे बढ़ जाती है,,ये मेरा अपना व्यक्तिगत अनुभव है कि ,हर कामयाब स्त्री की जिन्दगी में उनके पिता का बहुत योगदान होता है ,,,,
          मै बहुत  किस्मत  वाली हूँ जिसे अपने पिता का बहुत सारा स्नेह व दुलार मिला ..आजमै  अपनी कविता की कुछ पंक्तियाँ अपने पिता को समर्पित करना चाहती हूँ
                       
                             अन्तर्मन की हर हलचल को तुमने दिया किनारा है ,
                          कैसे बताऊँ पापा तेरा आलम्बन कितना प्यारा है ...
                            जीवन की हर कठिन डगर पर तुमने दिया सहारा है ,,
                           कैसे बताओं पापा तेरा आलम्बन कितना प्यारा है .....

रविवार, 14 अक्टूबर 2012

आज मैंने अपने नए ब्लॉग खुशियाँ की रचना की है ,,कोशिश करूंगी की हर रोज अपने विचारो को शब्दों में गढ़ कर  कुछ न कुछ लिखती रहूँ
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खुशियाँ ... किसी की ख्वाहिश,किसी की चाहत,किसी की मन्नत,किसी का जूनून,किसीका जमीर,किसी का अहंकार,किसी का आत्मसम्मान,किसी का मन चाहा   मेहमान .....ये सब किस या इनमे से कोई एक किसी की खुशिओं का कारण  हो सकते हैं।।
     दुनिया में कोई खुद की ख़ुशी में खुश रहता है  कोई दूसरों की ख़ुशी में ..मेरा आज का ब्लॉग समर्पित है मेरी मान को जो सदा दूसरों की खुशिओं में खुश रहती है फिर चाहे वो उसका अपना हो या पराया ..कभी कभी इस मुद्दे पे हमारे मतभेद भी हो जाते हैं लेकिन उनपे कोई फर्क नहीं पड़ता वो बस दूसरों की खुशिओं के लिए ही जीती है ,,उनका  अदम्य साहस ,उनकी कर्तव्यनिष्ठा ,उनकी हिम्मत सबको मेरा शत शत प्रणाम .......मम्मी  मै तुम्हारे सामने तो ये सब नहीं कहती क्योंकि अपनी इन्ही खुबिओं के चलते तुमने अपने आप को अस्वस्थ कर लिया है .........मेरी पहली कविता मैंने तुम्हारे लिए ही लिखी थी उसकी चंद पंक्तियाँ।।
                 
                      गर्मी की धुप में शीतल हवा सी प्यारी है तू
                    तेज बारिश से बचाती छतरी सी छाया है तू
                       चुभ जाए जो गम का एक भी कांटा
                      फूलों के कोमल स्पर्श सा सहलाती है तू ,
           ईश्वर से ज्यादा है मेरे दिल में तेरी जगह ,मेरी हर ख़ुशी का कारण है तू .
         इस जग में हर ख़ुशी से प्यारी ए माँ मेरी तो जिन्दगानी  है तू .....