शबनम बिखरी हर तरफ फिर,
फिर वही चांदनी रात है,
फिर वही चांदनी रात है,
प्रेम की चादर ओढ़ी दुल्हन,
खोई खोई कायनात है ..
रूमानी सा हर हवा का झोंका,
बहका सा हर अल्फाज है,
दिन को रातों की खबर नहीं,
हर लम्हा बेकरार है,
कह दो कि ये कुछ और नहीं,
बस प्यार है बस प्यार है।।।
छलक रही क्यूँ चांदनी,
क्या चाँद को सूझा रास है,
बहक रहा हर फूल फूल,
बहकी हवा भी आज है ,,
न तुम कुछ बोलो न सुनेंगे हम कुछ ,
आँखों ने किया इज़हार है,
कह दो की ये कुछ और नहीं,
बस प्यार है बस प्यार है .....
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