khushiyan

बुधवार, 24 अक्टूबर 2012

जो तुम हमको मिल जाते तो लम्हे बेचैन नहीं होते,

जो हम तुमको मिल जाते तो यूँ सूने रैन नहीं होते,
कुछ तुम कहते ,कुछ हम,तुम्हे देखते,तुम्हे पूजते ,
अंजान राहों पे सूनसान सी सडकों पर तेरे साथ चलते,

   जो तुम हमको मिल जाते तो लम्हे बेचैन नहीं होते।।

ख्वाबों सा गुलसितां सजाते,तिनको से आशियाँ बनाते ,
जो रूठ जाते कभी तुम मुझसे,कान पकड़ के तुम्हे मनाते,
तेरे बाँहों के घेरे में अपना प्यारा जहाँ बसाते ,

जो तुम हमको मिल जाते तो हम यूँ बेचैन नहीं होते ..



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