khushiyan

रविवार, 14 अक्टूबर 2012

आज मैंने अपने नए ब्लॉग खुशियाँ की रचना की है ,,कोशिश करूंगी की हर रोज अपने विचारो को शब्दों में गढ़ कर  कुछ न कुछ लिखती रहूँ
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खुशियाँ ... किसी की ख्वाहिश,किसी की चाहत,किसी की मन्नत,किसी का जूनून,किसीका जमीर,किसी का अहंकार,किसी का आत्मसम्मान,किसी का मन चाहा   मेहमान .....ये सब किस या इनमे से कोई एक किसी की खुशिओं का कारण  हो सकते हैं।।
     दुनिया में कोई खुद की ख़ुशी में खुश रहता है  कोई दूसरों की ख़ुशी में ..मेरा आज का ब्लॉग समर्पित है मेरी मान को जो सदा दूसरों की खुशिओं में खुश रहती है फिर चाहे वो उसका अपना हो या पराया ..कभी कभी इस मुद्दे पे हमारे मतभेद भी हो जाते हैं लेकिन उनपे कोई फर्क नहीं पड़ता वो बस दूसरों की खुशिओं के लिए ही जीती है ,,उनका  अदम्य साहस ,उनकी कर्तव्यनिष्ठा ,उनकी हिम्मत सबको मेरा शत शत प्रणाम .......मम्मी  मै तुम्हारे सामने तो ये सब नहीं कहती क्योंकि अपनी इन्ही खुबिओं के चलते तुमने अपने आप को अस्वस्थ कर लिया है .........मेरी पहली कविता मैंने तुम्हारे लिए ही लिखी थी उसकी चंद पंक्तियाँ।।
                 
                      गर्मी की धुप में शीतल हवा सी प्यारी है तू
                    तेज बारिश से बचाती छतरी सी छाया है तू
                       चुभ जाए जो गम का एक भी कांटा
                      फूलों के कोमल स्पर्श सा सहलाती है तू ,
           ईश्वर से ज्यादा है मेरे दिल में तेरी जगह ,मेरी हर ख़ुशी का कारण है तू .
         इस जग में हर ख़ुशी से प्यारी ए माँ मेरी तो जिन्दगानी  है तू .....

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