khushiyan

रविवार, 11 नवंबर 2012

दूर भगा के द्वेष के जाले ,
अहं का अंधकार मिटाएँ ,
सजा रंगोली,रंग निराले,,
आओ सब मिल दीप जलाएं 
आओ सब मिल दीप जलाएं ..

   पोछें आंसूं उन आँखों के,
 जिन हाथों में है नहीं खिलौने ,
थोड़ी सी रौशनी बांटें उनसे ,
ठन्डे पत्थर,जिनके बिछौने ,,

जिनको भूलें हैं जाने कब से ,
चलो उन अपनों को गले लगाएं,
आओ सब मिल दीप जलाएं,
आओ सब मिल दीप जलाएं ....

हर जर्रा हो दीप से रोशन,
हर कोना हो धवल श्वेत सा,
मन में उमंग हो,जैसे बचपन,
जीवन मुट्ठी की बंद रेत सा,

कल की चिंता छोड़ आज का,
आओ सब मिल जश्न मनाएं 
हे ! भारतवंशी तुम सब हम सब,
आओ सब मिल दीप जलाएं,,
आओ सब मिल दीप जलाएं ..,,,,,.....मेरे समस्त परिवार की तरफ से आप सभी को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ ....

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