बन्द कर दो अपनी बेटियों को परिकथा सुनाना
मत सुनाओ ऐसी कोई भी कहानी
जिसमें सफेद घोड़े पर बैठा राजकुमार
उसे उसकी सपनों की दुनिया मे ले जाएगा
उनकी किताबों से निकाल दो वो कहानियाँ
जिसमें कोई जादू से उसे राजकुमारी बना देगा।
कभी मत कहना कि ये घर तुम्हारा नहीं है
मत बोलना कि वो तुम्हारे बुढ़ापे का सहारा नहीं है।
उसे बताना कि तुम फूल नहीं वृक्ष हो
एक मजबूत वृक्ष,जिसे तोड़ना आसान नहीं है
दिला देना गुड़ियों के साथ कुछ कार और बंदूक के खिलौने
कभी न कहना, पेड़ों पर चढ़ना तुम्हारा काम नहीं है।
कहना कि तुम बहुत खूबसूरत हो बेटा
तन से ही नहीं मन से भी
किसी और की तारीफ के लिए खुद को घण्टों सजाना जरूरी नहीं है
उसे बताना हर किसी को तुम अच्छी ही लगो ऐसी कोई मजबूरी नहीं है।
बिटिया तुम बिटिया ही रहना
तुम जैसी हो पूर्ण हो
बेटा बनने की प्रतियोगिता का हिस्सा नहीं हो
स्त्रीत्व की गरिमा में सम्पूर्ण हो।
बहने देना नदियों की तरह, चिड़ियों सा उड़ने देना
हँसने देना रोने देना, जब सही हो वो,लड़ने देना
बताना कि उसके कपड़े चरित्र नहीं ,
व्यक्तित्व के परिचायक हैं
हक देना चुनने का उसको
जो भी उसके लायक हैं।
और एक बात जरूर बताना.....
वो जननी है,उसके जननांग उसकी शक्ति हैं
किसी की बुरी नजर या गलत स्पर्श से उसकी इज्जत कम नहीं होती
बेटियाँ भी बेटों सा ही जीवन जीती हैं
किसी भी पिता के चौखट की लाज धरम नहीं होती।।
पल्लवी विनोद
मत सुनाओ ऐसी कोई भी कहानी
जिसमें सफेद घोड़े पर बैठा राजकुमार
उसे उसकी सपनों की दुनिया मे ले जाएगा
उनकी किताबों से निकाल दो वो कहानियाँ
जिसमें कोई जादू से उसे राजकुमारी बना देगा।
कभी मत कहना कि ये घर तुम्हारा नहीं है
मत बोलना कि वो तुम्हारे बुढ़ापे का सहारा नहीं है।
उसे बताना कि तुम फूल नहीं वृक्ष हो
एक मजबूत वृक्ष,जिसे तोड़ना आसान नहीं है
दिला देना गुड़ियों के साथ कुछ कार और बंदूक के खिलौने
कभी न कहना, पेड़ों पर चढ़ना तुम्हारा काम नहीं है।
कहना कि तुम बहुत खूबसूरत हो बेटा
तन से ही नहीं मन से भी
किसी और की तारीफ के लिए खुद को घण्टों सजाना जरूरी नहीं है
उसे बताना हर किसी को तुम अच्छी ही लगो ऐसी कोई मजबूरी नहीं है।
बिटिया तुम बिटिया ही रहना
तुम जैसी हो पूर्ण हो
बेटा बनने की प्रतियोगिता का हिस्सा नहीं हो
स्त्रीत्व की गरिमा में सम्पूर्ण हो।
बहने देना नदियों की तरह, चिड़ियों सा उड़ने देना
हँसने देना रोने देना, जब सही हो वो,लड़ने देना
बताना कि उसके कपड़े चरित्र नहीं ,
व्यक्तित्व के परिचायक हैं
हक देना चुनने का उसको
जो भी उसके लायक हैं।
और एक बात जरूर बताना.....
वो जननी है,उसके जननांग उसकी शक्ति हैं
किसी की बुरी नजर या गलत स्पर्श से उसकी इज्जत कम नहीं होती
बेटियाँ भी बेटों सा ही जीवन जीती हैं
किसी भी पिता के चौखट की लाज धरम नहीं होती।।
पल्लवी विनोद
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