khushiyan

मंगलवार, 30 अक्टूबर 2012

दीवानों की इस महफिल में हर दिल का एक फसाना है ,
रातें इनकी सदियों लम्बी,हर हाथ में एक पैमाना है ..

       चूड़ी  उनकी चंदा जैसी,बिंदिया जैसे डूबती शाम,
     कुदरत के हर जर्रे पर उनको दिखे सनम का नाम।।

गेसू बादल बूँदें बारिश,आशिक का यही तराना है,
दीवानों की इस महफिल में हर दिल एक फसाना है।।

     भीगीं आँखे, सूनी रातें,हर हवा का झोंका दे पैगाम,,
  हर रस्ते पर, हर एक मोड़ पे, उनको ढूंढें मचलती शाम ..

गोदमे उनके सर रख के गुजरे,एक ऐसी शाम चुराना है ,
दीवानों की इस महफिल में हर दिल का एक फसाना है ... 

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